शेयर बाज़ार में गिरावट आते ही अधिकतर निवेशक घबरा जाते हैं और जल्दबाज़ी में फैसले ले सकते हैं। लेकिन मार्केट क्रैश में क्या करना चाहिए, यह समझना एक निवेशक के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। सही रणनीति अपनाई जाए तो कुछ निवेशक मार्केट क्रैश को संभावित निवेश अवसर के रूप में भी देख सकते हैं।
मार्केट क्रैश क्या होता है
मार्केट क्रैश से तात्पर्य शेयर बाज़ार के समग्र मूल्य में अचानक और उल्लेखनीय गिरावट से है, जिसमें शेयरों की कीमतें तेजी से नीचे आ जाती हैं। आमतौर पर जब किसी प्रमुख शेयर सूचकांक में कुछ दिनों या कम समय में तेज और उल्लेखनीय गिरावट आती है तो ऐसी स्थिति को मार्केट क्रैश या गंभीर बाजार गिरावट कहा जाता है। यह गिरावट आर्थिक संकट, भू-राजनीतिक तनाव, महामारी या निवेशकों के बीच फैली घबराहट के कारण हो सकती है।
मार्केट क्रैश में निवेशक अक्सर क्या गलतियाँ करते हैं?
मार्केट क्रैश के दौरान निवेशकों का भरोसा डगमगा जाता है और बाज़ार में व्यापक पैनिक सेलिंग होने लगती है। अधिकतर निवेशक घाटे में अपना निवेश बेच देते हैं, SIP बंद कर देते हैं और बाज़ार से पूरी तरह बाहर निकल जाते हैं।
मार्केट क्रैश के दौरान ध्यान रखने योग्य 6 बातें
बाज़ार में गिरावट के दौरान घबराने के बजाय सोच-समझकर कदम उठाना महत्वपूर्ण हो सकता है। ये 6 बातें निवेशकों को अपने निवेश को बेहतर ढंग से समझने और आगे की रणनीति पर विचार करने में मदद कर सकती हैं:
घबराकर निवेश न बेचें
ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि बाज़ार के सबसे अच्छे और सबसे कमजोर प्रदर्शन वाले दिन कई बार एक-दूसरे के काफी करीब आते हैं। इसलिए घबराहट में निवेश बेचने की बजाय कई निवेशक दीर्घकालिक दृष्टिकोण बनाए रखने और बाज़ार की संभावित रिकवरी की प्रतीक्षा करने को प्राथमिकता देते हैं।
पिछला प्रदर्शन भविष्य में कायम रह भी सकता है और नहीं भी और यह भविष्य में किसी रिटर्न की गारंटी नहीं है।
SIP जारी रखें
मार्केट क्रैश के दौरान SIP जारी रखना सबसे समझदारी भरा निर्णय होता है। जब Nifty गिरता है तो आप उन्हीं बड़ी कंपनियों के शेयर कम कीमत पर खरीद रहे होते हैं। SIP में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिल सकता है | गिरावट के दौरान कम NAV पर अधिक यूनिट्स मिल सकती हैं, और बाज़ार में रिकवरी आने पर पोर्टफ़ोलियो की वैल्यू में सुधार देखने को मिल सकता है।
अपने पोर्टफ़ोलियो की समीक्षा करें
मार्केट क्रैश कई निवेशकों के लिए अपने पोर्टफ़ोलियो की समीक्षा करने का अवसर हो सकता है। पोर्टफ़ोलियो रीबैलेंसिंग एक ऐसी रणनीति है, जिसमें समय-समय पर निवेश का बंटवारा बदला जाता है ताकि अलग-अलग एसेट क्लास का अनुपात निवेशक के लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार बना रहे।
नकदी (Liquidity) बनाए रखें
कम से कम 6 महीने के खर्चों के बराबर राशि लिक्विड फ़ंड में रखें और जो पैसा अगले 12 महीनों में चाहिए, उसे बाज़ार में न लगाएं। लिक्विड फ़ंड बचत खाते की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर रिटर्न दे सकते हैं और इनमें निवेश को आमतौर पर एक कार्यदिवस के भीतर रिडीम किया जा सकता है।
बचत खाते पर मिलने वाला रिटर्न निश्चित होता है, जबकि म्यूचुअल फंड पर रिटर्न बाज़ार जोखिमों के अधीन होते हैं।
लंबे समय का नज़रिया अपनाएं
बाज़ार में समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं और कई बार गिरावट के बाद रिकवरी भी देखने को मिली है। शेयर बाज़ार गिरने पर क्या करें, इसका एक सरल तरीका यह हो सकता है कि निवेशक अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखें और अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से अत्यधिक प्रभावित होने से बचें।
एक्सपर्ट से सलाह लें
मार्केट क्रैश के दौरान भावनाओं में बहकर निर्णय लेना कई बार निवेशकों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। कोई भी निर्णय लेने से पहले किसी वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें। SEBI-पंजीकृत सलाहकार आपकी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार सही मार्गदर्शन दे सकते हैं।
मार्केट क्रैश लंबे समय में कैसे अवसर बन सकता है?
जो निवेशक गिरावट के दौरान शांत रहते हैं, अनुशासित तरीके से निवेश जारी रखते हैं और लंबी अवधि का नज़रिया बनाए रखते हैं, वे बाज़ार में रिकवरी आने पर संभावित रूप से इसका लाभ उठा सकते हैं।
म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं, योजना से जुड़े सभी दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें।


