Sensex गिरने पर कुछ निवेशकों की पहली प्रतिक्रिया SIP रोकने की हो सकती है। लेकिन Sensex गिरने पर SIP बंद करनी चाहिए या नहीं, इसका जवाब निवेशक के लक्ष्य, निवेश अवधि, जोखिम क्षमता और वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है।
AMFI के जुलाई 2026 के आँकड़ों के अनुसार, करीब 50.30 लाख SIP बंद हुईं या उनका तय कार्यकाल पूरा हुआ। हालांकि, इन सभी मामलों को बाजार की घबराहट से जोड़ना उचित नहीं होगा।
गिरावट में SIP रोकने से आगे की किस्तें निवेश नहीं होतीं और कम NAV पर अधिक यूनिट खरीदने का संभावित अवसर छूट सकता है। इससे बाजार में बाद में सुधार आने पर आपके निवेश को उस रिकवरी से संभावित लाभ पाने का अवसर कम हो सकता है।
SIP और Sensex का क्या संबंध है?
SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान एक ऐसी निवेश पद्धति है जिसमें एक तय राशि नियमित अंतराल पर म्यूचुअल फ़ंड में निवेश की जाती है। SIP नियमित रूप से निवेश करने का एक तरीका है, जो निवेशक को बाजार का समय तय किए बिना निवेश जारी रखने में मदद कर सकता है। जब शेयर बाजार में गिरावट आती है, जो Sensex जैसे प्रमुख सूचकांकों में भी दिखाई दे सकती है, और SIP जारी रहती है, तो समान राशि में अधिक यूनिट मिल सकती हैं। यदि बाजार बाद में सुधरता है, तो कम कीमत पर खरीदी गई ये अतिरिक्त यूनिट निवेश के मूल्य में संभावित बढ़ोतरी में योगदान कर सकती हैं। इस तरह, नियमित निवेश रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का लाभ देने में मदद कर सकता है।
रुपी कॉस्ट एवरेजिंग क्या है और SIP में कैसे काम करता है?
रुपी कॉस्ट एवरेजिंग एक सरल लेकिन प्रभावी सिद्धांत है। नियमित अंतराल पर एक तय राशि निवेश करने से गिरावट में ज़्यादा यूनिट और तेज़ी में कम यूनिट मिलती हैं, जिससे समय के साथ प्रति यूनिट औसत खरीद लागत कम करने में मदद मिल सकती है। उदाहरण के लिए, अगर आप हर महीने ₹10,000 निवेश करते हैं और NAV ₹100 है तो 100 यूनिट मिलती हैं, लेकिन जब NAV गिरकर ₹70 हो जाती है तो उसी ₹10,000 में लगभग 142.86 यूनिट मिलती हैं। अगर बाजार बाद में बढ़ता है, तो कम NAV पर खरीदी गई अतिरिक्त यूनिट निवेश के मूल्य को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
दिखाए गए आंकड़े केवल उदाहरण के उद्देश्य से हैं।
बाज़ार गिरने पर SIP बंद करना सही है?
बाज़ार में गिरावट के दौरान SIP जारी रखने के संभावित असर को 2020 के COVID क्रैश के उदाहरण से समझा जा सकता है। उस दौरान Sensex और Nifty 50, दोनों प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट आई थी। Nifty 50 कुछ ही हफ्तों में करीब 37% गिरा था। वहीं, Sensex जनवरी 2020 में 42,273.87 के उच्च स्तर से मार्च 2020 में 25,638.90 के निचले स्तर तक आ गया था, यानी करीब 39% की गिरावट।
जिन निवेशकों ने उस दौरान इन सूचकांकों को ट्रैक करने वाली स्कीमों में अपनी SIP जारी रखी, उन्हें बाजार के निचले स्तरों पर यूनिट खरीदने का अवसर मिला होगा और बाद में हुई रिकवरी से संभावित लाभ मिल सकता था।
इतिहास में बड़े बाजार क्रैश के बाद रिकवरी के दौर भी देखे गए हैं।
इसी तरह, इतिहास में बड़े बाजार क्रैश के बाद रिकवरी के दौर भी देखे गए हैं। डॉट-कॉम संकट, 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और 2020 के COVID क्रैश जैसे दौरों के बाद प्रमुख इक्विटी बाजारों ने समय के साथ सुधार किया और कई मामलों में अपने पुराने स्तरों को पार किया। लंबी अवधि में भी इक्विटी बाजारों ने उतार-चढ़ाव के बावजूद ऊपर की ओर रुझान दिखाया है।
पिछला प्रदर्शन भविष्य में बना रह भी सकता है और नहीं भी। किसी निवेशक को मिलने वाला वास्तविक रिटर्न उसकी स्कीम, निवेश की तारीखों, निवेश अवधि और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
Source: NSE Indices, Nifty 50 Whitepaper 2026; BSE.
SIP बंद करने के नुकसान क्या हैं?
SIP बंद करना सिर्फ एक महीने की किस्त छोड़ना नहीं है, इससे कंपाउंडिंग, कम NAV पर यूनिट खरीदने की संभावना और वित्तीय लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।
कंपाउंडिंग का फायदा खो देते हैं
एक महीने की SIP छोड़ने का प्रभाव केवल ₹10,000 तक सीमित नहीं हो सकता, क्योंकि उस राशि पर मिलने वाली संभावित कंपाउंडिंग भी छूट सकती है। सालाना 12% रिटर्न की काल्पनिक दर मानें, तो यही ₹10,000 की राशि 10 साल में लगभग ₹31,058, 15 साल में लगभग ₹54,736 और 20 साल में लगभग ₹96,463 हो सकती है। यानी आज की एक छूटी हुई किस्त से भविष्य में मिलने वाला संभावित कोष कम हो सकता है। फिर भी, वास्तविक रिटर्न बाजार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा और इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती।
दिखाए गए आंकड़े केवल उदाहरण के उद्देश्य से हैं।
सस्ते में यूनिट खरीदने का मौका चूक जाता है
बाज़ार के अच्छे और बुरे दिन अक्सर एक-दूसरे के करीब रहे हैं बाजार के रिकवरी पीरियड से चूकने का निवेश के रिटर्न पर असर पड़ सकता है। गिरावट में कम NAV पर मिलने वाली यूनिट बाजार में बाद में तेजी आने पर निवेश के मूल्य को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
लक्ष्य पूरा होने में देरी होती है
लंबी निवेश अवधि होने पर बाजार के बीच-बीच के उतार-चढ़ाव का असर समय के साथ कम हो सकता है, क्योंकि निवेश को अलग-अलग बाजार चरणों से गुजरने और संभावित रिकवरी का लाभ लेने के लिए अधिक समय मिलता है। ऐसे में SIP बंद करना न केवल बनने वाले कॉर्पस को प्रभावित कर सकता है, बल्कि घर खरीदना, बच्चों की शिक्षा और रिटायरमेंट जैसे बड़े वित्तीय लक्ष्य भी पीछे खिसक सकते हैं।
कब SIP रोकना सही हो सकता है?
हर हाल में SIP जारी रखना हमेशा संभव नहीं होता। कुछ वास्तविक स्थितियों में इसे रोकने या दोबारा परखने पर विचार करना समझदारी हो सकती है, जैसे आय में बदलाव, वित्तीय प्राथमिकताओं में बदलाव, निवेश लक्ष्य, निवेश अवधि या जोखिम क्षमता में बदलाव।
आर्थिक आपातकाल में
अगर अचानक नौकरी जाए, आय रुक जाए या EMI जैसी अनिवार्य ज़िम्मेदारियाँ निभाना मुश्किल हो जाए, तो ऐसी स्थिति में SIP को अस्थायी रूप से रोकना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है। स्थिति सामान्य होने पर अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार SIP फिर से शुरू करने पर विचार किया जा सकता है।
फ़ंड का प्रदर्शन लगातार खराब हो तो
अगर कोई फंड लंबे समय से अपने बेंचमार्क और उसी श्रेणी की अन्य तुलनीय स्कीमों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन कर रहा हो, तो यह देखना उपयोगी हो सकता है कि वह स्कीम अब भी आपके निवेश उद्देश्य के अनुरूप है या नहीं। समीक्षा करते समय कमजोर प्रदर्शन के कारण, फंड की निवेश रणनीति, जोखिम प्रोफाइल और उपलब्ध अन्य उपयुक्त विकल्पों से उसकी तुलना पर भी विचार किया जा सकता है।
इसके बाद ही SIP बंद करने, स्कीम बदलने या निवेश से बाहर निकलने का फैसला करना बेहतर हो सकता है। सिर्फ प्रदर्शन को देखकर निर्णय लेना पर्याप्त नहीं होता।
निष्कर्ष
तेज़ बाज़ार गिरावट से निवेश का मूल्य थोड़े समय के लिए कम हो सकता है, लेकिन ऐसे समय में हर SIP किस्त कम कीमत पर अधिक यूनिट खरीदने का अवसर भी दे सकती है। SIP अलग-अलग बाज़ार स्थितियों में नियमित निवेश बनाए रखने के लिए बनाई गई है, इसलिए केवल बाज़ार गिरने के कारण इसे रोकना इस निवेश पद्धति को बीच में रोक सकता है।
इसलिए, केवल बाज़ार में गिरावट SIP बंद करने का उपयुक्त कारण नहीं हो सकती। अगर आपके लक्ष्य, निवेश अवधि और जोखिम क्षमता में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है, तो अस्थायी बाज़ार कमजोरी के दौरान भी अपनी निवेश योजना पर बने रहना अधिक उपयुक्त हो सकता है। हालांकि, आय, वित्तीय प्राथमिकताओं या चुनी गई स्कीम की उपयुक्तता में कोई वास्तविक बदलाव हो, तो SIP की समीक्षा करना उचित हो सकता है।
पिछला प्रदर्शन भविष्य में बना रह भी सकता है और नहीं भी।
म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, योजना से जुड़े सभी दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें।


